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क्या आप जानते हैं कि आपकी छत अगले 25 वर्षों तक आपका बिजली बिल कम करने में मदद कर सकती है?
क्या आपने कभी सोचा है कि जिस धूप को आप हर दिन यूं ही गुजरते हुए देखते हैं, वही धूप आपके परिवार के लिए बचत का सबसे बड़ा साधन बन सकती है?
क्या आप बढ़ते बिजली बिल, महंगे गैस सिलेंडर और बढ़ती महंगाई से परेशान हैं?
क्या आप जानते हैं कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत पात्र परिवारों को ₹78,000 तक की सब्सिडी दे रही है?
क्या आपने कभी हिसाब लगाया है कि अगले 20 से 25 वर्षों में आप बिजली पर कितने लाख रुपये खर्च कर सकते हैं?
क्या आप जानते हैं कि आज लाखों परिवार अपनी बिजली खुद बना रहे हैं?
क्या भविष्य में आपकी इलेक्ट्रिक बाइक या कार भी आपकी अपनी छत से मिलने वाली बिजली पर चल सकती है?
क्या आप जानते हैं कि सोलर सिस्टम पर पंखा, बल्ब, टीवी, फ्रिज, कूलर, मोटर, कंप्यूटर, वॉशिंग मशीन और आवश्यकता के अनुसार एसी तक चलाया जा सकता है?
क्या बढ़ती गैस कीमतों के बीच सोलर और इंडक्शन रसोई का खर्च कम करने में मदद कर सकते हैं?
क्या आपकी छत केवल छत है, या आने वाले वर्षों की बचत और आत्मनिर्भरता का आधार?
क्या आने वाले समय में सोलर हर घर की जरूरत बनने वाला है?
क्या आप भी चाहते हैं कि बढ़ती बिजली दरों का असर आपके परिवार के बजट पर कम पड़े?
क्या एक सही निर्णय आपके परिवार को वर्षों तक राहत दे सकता है?
बढ़ती महंगाई के दौर में सोलर बना आम परिवारों की नई उम्मीद
यदि इन सवालों ने आपका ध्यान खींचा है, तो इसका कारण यह है कि ये सवाल केवल सवाल नहीं हैं, बल्कि आज देश के करोड़ों परिवारों की वास्तविक चिंता हैं। हर महीने आने वाला बिजली बिल, रसोई गैस की बढ़ती कीमतें, पेट्रोल और डीजल पर बढ़ता खर्च तथा भविष्य को लेकर आर्थिक चिंता लगभग हर घर में चर्चा का विषय है। ऐसे समय में एक ऐसी तकनीक तेजी से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है जो न केवल बिजली बनाने का साधन है, बल्कि बचत, आत्मनिर्भरता और भविष्य की सुरक्षा का माध्यम भी बन रही है। यह तकनीक है सोलर ऊर्जा।
आज भारत एक बड़े ऊर्जा परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। जिस देश में कभी लोग बिजली कटौती और महंगे बिलों से परेशान रहते थे, वहीं अब लाखों परिवार अपनी छतों को छोटे बिजली घर में बदल रहे हैं। गांवों से लेकर महानगरों तक सोलर पैनलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लोग अब यह समझने लगे हैं कि सूरज की रोशनी केवल गर्मी और उजाला ही नहीं देती, बल्कि आर्थिक राहत का रास्ता भी दिखा सकती है।
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना ने इस परिवर्तन को नई गति दी है। सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक परिवार अपनी बिजली स्वयं तैयार करें। इसी उद्देश्य से पात्र परिवारों को 3 किलोवाट तक के आवासीय सोलर सिस्टम पर ₹78,000 तक की केंद्रीय सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। यह सब्सिडी उन परिवारों के लिए एक बड़ा अवसर है जो बिजली बिल से राहत चाहते हैं और भविष्य के लिए एक मजबूत व्यवस्था बनाना चाहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आज जो परिवार सोलर अपना रहे हैं, वे केवल वर्तमान के लिए नहीं बल्कि आने वाले 20 से 25 वर्षों के लिए योजना बना रहे हैं। बिजली की दरें हर वर्ष बढ़ती हैं, लेकिन सूर्य की रोशनी आज भी मुफ्त है और आने वाले वर्षों में भी मुफ्त रहेगी। यही कारण है कि सोलर को खर्च नहीं बल्कि दीर्घकालिक निवेश माना जाता है।
आखिर सोलर ऊर्जा है क्या?
सरल भाषा में समझें तो सोलर ऊर्जा सूर्य की रोशनी से बनाई गई बिजली है। घर की छत पर लगाए गए सोलर पैनल सूर्य की किरणों को बिजली में बदल देते हैं। यह बिजली घर के विभिन्न उपकरणों को चलाने में उपयोग की जाती है। इस प्रक्रिया में न कोई ईंधन जलता है, न धुआं निकलता है और न ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है।
भारत जैसे देश के लिए सोलर ऊर्जा का महत्व और भी अधिक है क्योंकि यहां वर्ष के अधिकांश दिनों में पर्याप्त धूप उपलब्ध रहती है। यही कारण है कि भारत को दुनिया के सबसे संभावनाशील सौर ऊर्जा बाजारों में गिना जाता है।
क्यों बढ़ रही है सोलर की मांग?
कुछ वर्ष पहले तक सोलर को एक महंगी तकनीक माना जाता था। लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। तकनीक बेहतर हुई है, कीमतें पहले की तुलना में अधिक सुलभ हुई हैं और सरकार की सब्सिडी ने इसे आम लोगों की पहुंच तक पहुंचा दिया है।
दूसरी ओर बिजली की बढ़ती दरों ने लोगों को सोचने पर मजबूर किया है। हर साल बिजली की लागत बढ़ रही है। गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य उपकरणों के कारण बिजली बिल कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में लोग ऐसे विकल्प की तलाश कर रहे हैं जो उन्हें लंबे समय तक राहत दे सके।
यही कारण है कि सोलर ऊर्जा को आज केवल एक तकनीक नहीं बल्कि आर्थिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
सोलर पर क्या-क्या चल सकता है?
बहुत से लोगों के मन में यह भ्रम होता है कि सोलर केवल बल्ब और पंखा चलाने के लिए उपयोगी है। लेकिन आधुनिक सोलर सिस्टम की क्षमता इससे कहीं अधिक है।
उचित क्षमता का सोलर सिस्टम घर के अधिकांश सामान्य उपकरणों को चलाने में सक्षम होता है। पंखा, बल्ब, टीवी, फ्रिज, कूलर, कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल चार्जिंग, इंटरनेट राउटर, सीसीटीवी कैमरा और पानी की मोटर जैसे उपकरण आसानी से चलाए जा सकते हैं। आवश्यकता और क्षमता के अनुसार एयर कंडीशनर भी चलाया जा सकता है।
इसी वजह से आज सोलर केवल बिजली बचाने का माध्यम नहीं बल्कि आधुनिक जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।
बढ़ती गैस कीमतों के बीच इंडक्शन और सोलर की बढ़ती भूमिका
वर्तमान समय में रसोई गैस की कीमतें आम परिवारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। हर बार सिलेंडर भरवाने पर परिवार के बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे में लोग वैकल्पिक उपायों की तलाश कर रहे हैं।
इंडक्शन चूल्हा इसी दिशा में एक लोकप्रिय विकल्प बनकर सामने आया है। इंडक्शन पर खाना बनाना आसान, सुरक्षित और सुविधाजनक माना जाता है। हालांकि यह बिजली पर चलता है, लेकिन यदि पर्याप्त क्षमता का सोलर सिस्टम लगाया जाए तो दिन के समय इंडक्शन चलाने के लिए आवश्यक बिजली सोलर से प्राप्त की जा सकती है।
कई परिवार अब सुबह और दोपहर का भोजन सोलर ऊर्जा से चलने वाले इंडक्शन पर तैयार कर रहे हैं। इससे गैस सिलेंडर की खपत कम करने में मदद मिलती है और घरेलू खर्च पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय रसोई में गैस और सोलर आधारित इंडक्शन का संयुक्त उपयोग तेजी से बढ़ सकता है।
पेट्रोल-डीजल से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ता भारत
परिवहन क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने लोगों को नए विकल्पों की ओर देखने के लिए प्रेरित किया है। इसी कारण इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
आज देशभर में इलेक्ट्रिक स्कूटर, बाइक और कारों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। लोग इसे भविष्य की तकनीक मान रहे हैं। लेकिन इलेक्ट्रिक वाहन को नियमित रूप से चार्ज करने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है।
यहीं पर सोलर ऊर्जा की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। पर्याप्त क्षमता वाला सोलर सिस्टम दिन के समय बनने वाली बिजली का उपयोग वाहन चार्ज करने में भी सहायता कर सकता है। इससे भविष्य में परिवहन खर्च को कम करने की दिशा में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में जिन घरों में सोलर सिस्टम होगा, वे इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति का सबसे अधिक लाभ उठा सकते हैं।
ऑन-ग्रिड और हाइब्रिड सोलर में क्या अंतर है?
सोलर सिस्टम मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं—ऑन-ग्रिड और हाइब्रिड।
ऑन-ग्रिड सिस्टम बिजली विभाग के ग्रिड से जुड़ा होता है। दिन में यदि सोलर अधिक बिजली बनाता है और घर में उसकी खपत कम होती है, तो अतिरिक्त बिजली ग्रिड में चली जाती है। इससे बिजली बिल में राहत मिल सकती है।
दूसरी ओर हाइब्रिड सिस्टम में बैटरी भी लगी होती है। दिन में बनने वाली अतिरिक्त बिजली बैटरी में संग्रहित की जा सकती है। बिजली कटने की स्थिति में यही बैटरी आवश्यक उपकरणों को चलाने में सहायता करती है।
ग्रामीण क्षेत्रों और उन इलाकों में जहां बिजली कटौती की समस्या अधिक रहती है, वहां हाइब्रिड सिस्टम लोगों के लिए उपयोगी विकल्प माना जाता है।
सोलर और पर्यावरण
आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण की चुनौती का सामना कर रही है। कोयला, डीजल और पेट्रोलियम आधारित ऊर्जा स्रोत प्रदूषण बढ़ाते हैं। इसके विपरीत सोलर ऊर्जा स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है।
जब कोई परिवार सोलर अपनाता है तो वह केवल अपना खर्च कम नहीं करता, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा देता है। यही कारण है कि सरकारें और पर्यावरण विशेषज्ञ सोलर ऊर्जा को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
भविष्य का भारत और सोलर ऊर्जा
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सोलर ऊर्जा का महत्व और बढ़ेगा। बिजली की मांग बढ़ेगी, इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ेगी और स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता भी बढ़ेगी। ऐसे में सोलर केवल एक विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन सकता है।
जो परिवार आज सोलर अपना रहे हैं, वे भविष्य की तैयारी कर रहे हैं। वे केवल बिजली बिल कम करने की सोच नहीं रहे, बल्कि अपने परिवार को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
शायद यही कारण है कि आज देशभर में लोग अपनी छत को नए नजरिए से देख रहे हैं। जो छत कभी केवल घर का हिस्सा मानी जाती थी, वही अब बचत, आत्मनिर्भरता और भविष्य की सुरक्षा का माध्यम बनती जा रही है।
सूरज हर दिन उगता है। उसकी रोशनी हर दिन हमारे घरों तक पहुंचती है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब लोग उस रोशनी को बचत, सुविधा और भविष्य की ताकत में बदलना सीख रहे हैं। और यही बदलाव आने वाले भारत की ऊर्जा कहानी को नई दिशा दे सकता है।
अभी के लिए इतना ही अगले वीडियो में हम जानेंगे कि कितने किलो वाट के सोलर में हम क्या-क्या यूज कर सकते हैं और कितने किलो वाट के सोलर लगाने में कितना खर्च आएगा और सब्सिडी का लाभ कैसे लेंगे। धन्यवाद
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अररिया -अग्नि सुरक्षा को लेकर निकाली गई प्रभात फेरी
प्रेस विज्ञप्ति
अररिया, 31 जनवरी 2026
जिलाधिकारी ने विधि-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा आमजन से जुड़े मामलों को संवेदनशीलता के साथ त्वरित समाधान सुनिश्चित करने दिए गए निर्देश
जिला पदाधिकारी अररिया श्री विनोद दूहन एवं पुलिस अधीक्षक अररिया श्री जितेन्द्र कुमार की संयुक्त अध्यक्षता में डीआरसीसी अररिया से वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से विधि-व्यवस्था से संबंधित मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक के भू-समाधान पोर्टल पर लंबित मामलों, लोक-भूअतिक्रमण, उत्पाद विभाग के कार्यों, थाना एवं ओपी में सीसीटीवी कैमरों के अधिष्ठापन, नीलाम पत्र से संबंधित मामलों, शस्त्र सत्यापन सहित अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से समीक्षा की गई।
जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा सभी अंचलाधिकारी को प्रत्येक माह में कम से कम 05 लोक-भूअतिक्रमण के मामलों का निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित किया जाए तथा कार्यों में पारदर्शिता एवं समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए।
बैठक में जिला पदाधिकारी द्वारा सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए जिले में विधि-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा आमजन से जुड़े मामलों का संवेदनशीलता के साथ त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, फारबिसगंज सहित सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, थानाध्यक्ष, नगर निकायों के पदाधिकारी एवं संबंधित विभागों के प्रखंडस्तरीय पदाधिकारी अपने-अपने अनुमंडल एवं प्रखंड मुख्यालय से वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
बैठक में भौतिक रूप से अपर समाहर्ता अररिया श्री अनिल कुमार झा, प्रभारी पदाधिकारी शस्त्र प्रशाखा, जिला नीलाम पत्र पदाधिकारी, जिला खनन पदाधिकारी, उत्पाद अधीक्षक सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।
02 से 06 फरवरी 2026 तक फार्मर रजिस्ट्री को लेकर चलेगा विशेष महाअभियान
जिला पदाधिकारी अररिया श्री विनोद दूहन की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित परमान सभागर में शुक्रवार को आगामी 02 फरवरी से 06 फरवरी 2026 तक फार्मर रजिस्ट्री के विशेष महाअभियान की सफलता को लेकर संबंधित पदाधिकारी के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। साथ ही बैठक में अररिया जिला में चल रहे फार्मर रजिस्ट्री अभियान की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा शेष किसानों का पंजीकरण शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए।
बैठक में बताया गया कि अररिया जिले के सभी किसान बंधुओं के लिए फार्मर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य है, ताकि भविष्य में सरकार द्वारा संचालित सभी कृषि एवं किसान कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन्हें सुगमता एवं पारदर्शिता के साथ प्राप्त हो सके। जिले में अबतक कुल 1,08,731 किसानों का फार्मर रजिस्ट्री किया जा चुका है।
अररिया जिले के सभी किसानों का फार्मर रजिस्ट्री सुगमता से हो सके। इस हेतु दिनांक 02.02.2026 से 06.02.2026 तक महाअभियान चलाया जायेगा। इस महाअभियान में प्रत्येक प्रखण्ड में फार्मर रजिस्ट्री हेतु 85 दल गठित की गई है, जो जिले के प्रत्येक वार्ड में जायेगी। इस प्रकार जिले में प्रत्येक दिन 765 वार्ड में फार्मर रजिस्ट्री का कार्य सम्पन्न करते हुए दिनांक 06.02.2026 तक योग्य किसानों का शत प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री कार्य किया जा सकेगा। इसकी पूर्व सूचना संबंधित अंचलाधिकारी द्वारा संबंधित वार्ड के किसानों को दी जा रही है।
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को पूर्व सूचना देकर उन्हंे वार्ड में निर्धारित तिथि को उपस्थित रहने के लिए प्रेरित करें। साथ ही उन्होंने कहा कि जमीन से संबंधित दस्तावेजों में त्रुटि के कारण यदि किसी किसान की फार्मर रजिस्ट्री में कठिनाई आ रही हो, तो उसके त्वरित सुधार के लिए परिमार्जन हेतु ऑनलाइन आवेदन कराया जाए। ऐसे आवेदनों का निराकरण संबंधित अंचलाधिकारी द्वारा 24 घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जाए, तदोपरांत किसान द्वारा फार्मर रजिस्ट्री कराया जा सकें।
सभी किसान बन्धुओं से आग्रह है कि जिस दिन आपके वार्ड में फार्मर रजिस्ट्री की दल पहुँचे, अपने वार्ड में उपस्थित रहें और अपना-अपना फार्मर रजिस्ट्री करा लें।
प्रेस विज्ञप्ति
अररिया, 31 जनवरी 2026
जिलाधिकारी द्वारा इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2026 कदाचारमुक्त एवं शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराने हेतु दिए गए निर्देश
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना द्वारा आयोजित इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा-2026 के सफल, शांतिपूर्ण एवं कदाचारमुक्त आयोजन को लेकर जिला पदाधिकारी अररिया श्री विनोद दूहन एवं पुलिस अधीक्षक अररिया श्री जितेन्द्र कुमार की संयुक्त में अध्यक्षता डीआरसीसी भवन अररिया में सभी केंद्राधीक्षक, स्टैटिक दंडाधिकारी, गश्तीदल दंडाधिकारी, उड़नदस्ता दल, अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी एवं परीक्षा से सम्बद्ध सभी पदाधिकारियों के साथ ब्रीफिंग बैठक आयोजित की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा जारी मार्गदर्षिका अनुरूप परीक्षा कदाचारमुक्त एवं शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराना सुनिष्चित किया जाय। उन्होंने कहा कि इंटरमीडिएट परीक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जायेगी। परीक्षा संचालन से जुड़े प्रत्येक पदाधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण जवाबदेही और सतर्कता के साथ करें। उन्होंने परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, वीडियोग्राफी, प्रवेश द्वार पर कड़ी जांच तथा केंद्र के अंदर सतत पर्यवेक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
स्टेटिक दंडाधिकारी को निर्देश दिया गया कि परीक्षा केन्द्र पर केवल परीक्षार्थियों को ही परीक्षा केन्द्र के मुख्य द्वार पर उनके प्रवेश पत्र एवं एक फोटोयुक्त पहचान पत्र को दखेकर अन्दर जाने अनुमति देंगे। परीक्षा केन्द्र में प्रवेश कराने से पूर्व सभी परीक्षार्थियों का संघन फ्रिस्किंग सुनिश्चित की जायेगी। महिला परीक्षार्थियों की फ्रिस्किंग हेतु महिला वीक्षक की प्रतिनियिुक्त करने का निर्देश दिया गया है।
बैठक में बताया गया इंटरमीडिएट परीक्षा अररिया जिला के कुल 44 परीक्षा केंद्रों पर दिनांक 02 फरवरी 2026 से प्रारंभ होकर 13 फरवरी 2026 तक दो पालियों में आयोजित होगी। जिसमें अररिया अनुमंडल में 23 एवं फारबिसगंज अनुमंडल में 21 परीक्षा केंद्र शामिल हैं। प्रथम पाली की परीक्षा 9ः30 पूर्वाह्न से 12ः45 अपराह्न तक तथा द्वितीय पाली की परीक्षा 2ः00 अपराह्न से 5ः15 अपराह्न तक निर्धारित है। परीक्षार्थियों को परीक्षा प्रारंभ होने से 30 मिनट पूर्व तक ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। विलंब से आने वाले परीक्षार्थियों को प्रवेश नहीं दिया जायेगा। साथ ही परीक्षा केंद्र में जूता-मोजा पहनकर प्रवेश वर्जित किया गया है। परीक्षा केंद्रों के आसपास बी0एन0एस0एस0 की धारा 163 लागू रहेगी।
इंटरमीडिएट परीक्षा अवधि के दौरान उद्योग भवन अररिया में दूरभाष संख्या 06453-222309 पर जिला नियंत्रण कक्ष कार्यरत रहेगा। इसके प्रभार में अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, अररिया रहेंगे। वहीं परीक्षा के वरीय प्रभार में अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन, अररिया श्री नवनील कुमार रहेंगे। बैठक में संबंधित पदाधिकारी गण उपपस्थित थे।
ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण हेतु समन्वय बैठक व सितारा योजना उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित
ट्रांसजेंडर समुदाय के व्यक्तियों के कल्याणार्थ एवं उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने हेतु समन्वय बैठक तथा सितारा योजना संबंधी उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन समाज कल्याण विभाग अंतर्गत जिला बाल संरक्षण इकाई अररिया के तत्वावधान में जिला पदाधिकारी अररिया श्री विनोद दूहन के निर्देशानुसार किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सहायक निदेशक बाल संरक्षण इकाई अररिया श्री शंभू कुमार रजक, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार अररिया श्री अभय श्रीवास्तव, विशेषज्ञ रेशमा प्रसाद, चिकित्सक डॉक्टर जितेंद्र कुमार, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी आईसीडीएस श्रीमती कविता कुमारी एवं उपस्थित सभी हितधारकों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वालित कर किया।
कार्यक्रम के स्वागत संबोधन में सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई अररिया श्री शंभू कुमार रजक ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रति समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों से आग्रह किया कि सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ट्रांसजेंडर समुदाय को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार अररिया के सचिव श्री रोहित श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा है। इन्हें समाज से अलग नहीं, बल्कि साथ जोड़कर आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कानूनी अधिकारों, संरक्षण एवं जागरूकता पर बल देते हुए कहा कि अधिकारों की जानकारी से ही सामाजिक समावेशन संभव है।
कार्यक्रम की मुख्य वक्त विशेषज्ञ रेशमा प्रसाद ने लिंग की परिभाषा को विस्तार पूर्वक समझाते हुए कहा कि जेंडर एक प्रकार से परफॉर्मेंस है, जो किस प्रकार परफॉर्म करता है यह उस पर निर्भर करता हैऔर प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पहचान स्वीकार करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि किसी की पहचान अपराध नहीं है, बल्कि उसकी अस्मिता है। “मेरी पहचान मेरा जेंडर है”—इस विचार के साथ उन्होंने समाज से अपील की कि ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मान, अवसर और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाए, ताकि वे आत्मसम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ सकें।
उन्होंने कहा कि 'सितारा' योजना विशेष रूप से ट्रांसजेंडर समुदाय के सशक्तिकरण, सामाजिक एकीकरण, पुनर्वास और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक बनाया गया है। इस योजना के तहत, जिलेवार कमिटी गठित की गई है जो पहचान पत्र जारी करने, समुदाय को जागरूकता करने और कानूनी सहायता के माध्यम से ट्रांसजेंडर समुदाय की चुनौतियों का समाधान करने का काम करती हैं। उन्होंने अपने संबोधन में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की समस्याएं, सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास एवं माननीय न्यायालय के आदेश संबंधी विशेष जानकारी एवं अपना अनुभव भी साझा किए।
इससे पूर्व उपस्थित अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से ट्रांसजेंडर समुदाय के उपस्थित सभी व्यक्तियों को शॉल एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से ट्रांसजेंडर समुदाय के सामाजिक, आर्थिक एवं कानूनी सशक्तिकरण को लेकर सकारात्मक संवाद स्थापित हुआ। बैठक में महाप्रबंधक उद्योग केंद्र अररिया सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, कर्मी एवं किन्नर समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे।
ऑन-फार्म जल प्रबंधन प्रशिक्षण से किसानों को मिली वैज्ञानिक खेती की नई दिशा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग द्वारा आत्मा, समस्तीपुर के प्रायोजन से आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “भूमि एवं जल उत्पादकता बढ़ाने हेतु ऑन-फार्म जल प्रबंधन रणनीतियाँ” का सफलतापूर्वक समापन 30 जनवरी 2026 को हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में समस्तीपुर जिले से आए 31 किसान प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए आधुनिक कृषि जल प्रबंधन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में टिकाऊ कृषि के लिए वैज्ञानिक जल प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने तथा अन्य किसानों तक भी पहुँचाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि उत्पादन, जल उपयोग दक्षता तथा किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
डॉ. आशुतोष उपाध्याय, विभागाध्यक्ष, भूमि एवं जल प्रबंधन ने प्रशिक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एकीकृत भूमि-जल प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई, सेंसर आधारित तकनीक, प्राकृतिक खेती एवं मौसम आधारित निर्णय प्रणाली किसानों को संसाधनों के कुशल उपयोग के लिए सक्षम बनाती है। उन्होंने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक सोच के साथ कृषि अपनाने के लिए प्रेरित किया।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, उन्नत भूमि एवं जल प्रबंधन तकनीकें, कृषि में आईओटी एवं एआई/एमएल का उपयोग, फसल विविधीकरण तथा मौसम आधारित कृषि जल प्रबंधन पर व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने अनुसंधान प्रक्षेत्रों और मृदा प्रयोगशालाओं का भ्रमण कर तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव भी प्राप्त किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ. पवन जीत, डॉ. आरती कुमारी, डॉ. आशुतोष उपाध्याय, डॉ. पी. के. सुंदरम, डॉ. राकेश कुमार एवं डॉ. कीर्ति सौरभ के सहयोग से तथा डॉ. सुमीत सौरभ (परियोजना निदेशक, आत्मा, समस्तीपुर) के प्रायोजन में संचालित किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. मणिभूषण, डॉ. अजय कुमार, डॉ. विकास कुमार एवं डॉ. शिवानी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
जनता दरबार में जिलाधिकारी, परिवादों के त्वरित, पारदर्शी एवं प्रभावी समाधान के दिए निर्देश
बिहार सरकार के सात निश्चय-3.0 के अंतर्गत “सबका सम्मान-जीवन आसान” कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को समाहरणालय स्थित परमान सभागार में जिला पदाधिकारी अररिया श्री विनोद दूहन की अध्यक्षता में जनता दरबार का आयोजन किया गया। जनता दरबार में भूमि विवाद से जुड़े अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इस क्रम में जिलाधिकारी द्वारा बारी-बारी से फरियादियों की समस्याएं सुनी गई तथा कई मामालों में जिलाधिकारी द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
जनता दरबार का मुख्य उद्देश्य पंचायत एवं जिला स्तर पर आम नागरिकों की समस्याओं को सीधे सुनकर उनका त्वरित, पारदर्शी एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना रहा।
जनता दरबार में साधना झा ने दूसरे पक्ष द्वारा जबरन भूमि कब्जा किए जाने की शिकायत दर्ज कराई। राजा बैठा ने अपनी भूमि को रोक सूची से हटाने का अनुरोध किया। वहीं राजेंद्र प्रसाद एवं इकलाख अहमद ने भूमाफियाओं द्वारा निजी भूमि पर गलत जमाबंदी कायम किए जाने की शिकायत की।
मनोज कुमार ने बीरनगर पश्चिम पंचायत में अनुज्ञप्ति रद्द जन वितरण प्रणाली दुकानदार द्वारा मिलीभगत कर दुकान संचालन के संबंध में शिकायत दर्ज कराया गया।
इसके अतिरिक्त मो0 पिंकी देवी ने अनुकंपा के आधार पर नियोजन की मांग की।
दीपक कुमार, प्रवीण कुमार, अंकित कुमार सहित अन्य ने संयुक्त आवेदन देकर निर्वाचन में किए गए कार्य की दैनिक मजदूरी भुगतान की मांग रखी। इसी प्रकार जनता दरबार में प्रा0वि0 रामकृपाल महतो टोला भरगामा तथा उ0म0 विद्यालय बटुरबाड़ी अररिया का भूमि अतिक्रमण करने, लंबित वेतन भुगतान, भू-अर्जन से संबंधित मुआवजा भुगतान सहित अन्य मामलों पर भी सुनवाई की गई।
मौके पर अपर समाहर्ता श्री अनिल कुमार झा, अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन श्री नवनील कुमार, उप विकास आयुक्त श्रीमती रोजी कुमारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता अररिया एवं फारबिसगंज, सहायक निदेशक दिव्यांगजन कोषांग, अंचलाधिकारी अररिया सहित संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।
जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र का जिलाधिकारी ने किया निरीक्षण, उपस्थित आवेदकों से किया संवाद
जिला पदाधिकारी अररिया श्री विनोद दूहन द्वारा जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र (डीआरसीसी), अररिया का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के क्रम में उन्होंने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना, मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना तथा कुशल युवा कार्यक्रम के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
जिला पदाधिकारी ने डीआरसीसी में उपस्थित आवेदकों से सीधे संवाद कर आवेदन करने में उन्हें किसी प्रकार की समस्या या अन्य कठिनाइयों का सामना तो नहीं करना पड़ रहा है, इसकी जानकारी प्राप्त की गई। उन्होंने आवेदकों से योजना से संबंधित मार्गदर्शन, दस्तावेज़ सत्यापन, ऑनलाइन आवेदन तथा स्वीकृति प्रक्रिया की स्थिति के बारे में भी फीडबैक लिया।
निरीक्षण के क्रम में डीएम ने डीआरसीसी प्रबंधक को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं का लाभ पात्र युवाओं तक समयबद्ध, पारदर्शी एवं सरल प्रक्रिया के माध्यम से पहुँचाया जाए। साथ ही, उन्होंने कर्मियों को आवेदकों के प्रति सहयोगी एवं संवेदनशील व्यवहार अपनाने का निर्देश दिया।
जिला पदाधिकारी ने केंद्र में उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं, काउंटर व्यवस्था, प्रतीक्षालय, सूचना पट्ट एवं कार्यप्रणाली का भी अवलोकन किया। मौके पर डीआरसीसी प्रबंधक सहित जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र के सभी पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।
समेकित खेती एवं फसल विविधीकरण ने पश्चिम चंपारण के किसानों को दिखाई नई राह : दो दिवसीय कार्यशाला का सफल समापन
पश्चिम चंपारण के किसानों के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना तथा कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के संयुक्त तत्वाधान मे आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि खेती को लेकर सोच बदलने का अनुभव बनकर सामने आया।
दिनांक 28 से 29 जनवरी 2026 तक चले इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले जिले के 200 से अधिक किसानों ने महसूस किया कि सीमित भूमि और संसाधनों के बावजूद खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। कार्यक्रम में शामिल किसानों ने जाना कि अब खेती केवल धान या गेहूं तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और जैविक खाद निर्माण जैसे कार्यों को जोड़कर वर्ष भर नियमित आय प्राप्त की जा सकती है।
विशेषज्ञों द्वारा दी गई व्यावहारिक जानकारी ने किसानों को यह विश्वास दिलाया कि बदलते मौसम और बाजार की अनिश्चितताओं के बीच भी खेती सुरक्षित बन सकती है।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि श्री आर. के. तिवारी, प्रबंधक, मगध शुगर मिल, बेतिया ने किसानों के अनुभवों को सुनते हुए कहा कि जब किसान वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाते हैं, तभी ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि कृषि और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल से किसानों को बाजार से जोड़ना आसान होगा और उनकी उपज को सही मूल्य मिलेगा।
कार्यशाला के आयोजन सचिव फसल अनुसंधान प्रभाग के प्रभागाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने किसानों को यह संदेश दिया कि खेती में विविधता ही स्थायित्व की कुंजी है। उन्होंने बताया की समेकित कृषि प्रणाली किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त माध्यम है जबकि फसल विविधीकरण को अपनाकर जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिमों का प्रभाव भी कम किया जा सकता है।
कार्यशाला की संयोजक प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिवानी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते जलवायु के परिद्रश्य मे सिर्फ धान और गेंहु की खेती तक सीमित रहना किसानों के लिए जोखिमप्रद हैं, अतः दलहन, तिलहन, सब्जी एवं चारा फसलों के माध्यम से खेती मे विविधता लाकर किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सकती है।
कार्यशाला के दौरान किसानों को पावर स्प्रेयर, नैपसैक स्प्रेयर, वर्मी बेड और कुदाल जैसे कृषि आदान भी प्रदान किए गए, जिससे फसल सुरक्षा, रोग-कीट प्रबंधन एवं जैविक खाद उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कुलपति डॉ. पी. एस. पाण्डेय का सहयोग प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में आईसीएआर–आरसीईआर, पटना के वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक कुमार, डॉ. गौस अली एवं डॉ. शिवानी सहित कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के विषय-वस्तु विशेषज्ञ डॉ. जगपाल, डॉ. हर्षा बी. आर., डॉ. सौरभ दुबे एवं केंद्र के कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका रही। कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने कहा कि किसानों की सफलता ही ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस कार्यशाला से प्रेरित किसान आने वाले समय में अपने गांवों में दूसरों के लिए उदाहरण बनेंगे।
अंत मे धन्यवाद ज्ञापन कार्यशाला की संयोजक एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिवानी ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, किसानों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।