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Ravi Kumar
24 Views · 8 months ago

Copy of Kahani बहू का लौटा बचपन - hindi kahaniya _ story time _ saas bahu _ new story _ kahaniya _ stories(360P)

Ravi Kumar
41 Views · 8 months ago

Copy of Kahani रूप बदलने वाली बहु 2 _ moral stories _ Hindi Story _ Stories _ Bedtime Stories _ Kahaniya(360P)

Ravi Kumar
19 Views · 7 months ago

Naughty Boy

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Ayush Prakash
35 Views · 8 months ago

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Margdarshak News
6 Views · 3 months ago

⁣समेकित खेती एवं फसल विविधीकरण ने पश्चिम चंपारण के किसानों को दिखाई नई राह : दो दिवसीय कार्यशाला का सफल समापन
पश्चिम चंपारण के किसानों के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना तथा कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के संयुक्त तत्वाधान मे आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि खेती को लेकर सोच बदलने का अनुभव बनकर सामने आया।
दिनांक 28 से 29 जनवरी 2026 तक चले इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले जिले के 200 से अधिक किसानों ने महसूस किया कि सीमित भूमि और संसाधनों के बावजूद खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। कार्यक्रम में शामिल किसानों ने जाना कि अब खेती केवल धान या गेहूं तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और जैविक खाद निर्माण जैसे कार्यों को जोड़कर वर्ष भर नियमित आय प्राप्त की जा सकती है।
विशेषज्ञों द्वारा दी गई व्यावहारिक जानकारी ने किसानों को यह विश्वास दिलाया कि बदलते मौसम और बाजार की अनिश्चितताओं के बीच भी खेती सुरक्षित बन सकती है।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि श्री आर. के. तिवारी, प्रबंधक, मगध शुगर मिल, बेतिया ने किसानों के अनुभवों को सुनते हुए कहा कि जब किसान वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाते हैं, तभी ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि कृषि और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल से किसानों को बाजार से जोड़ना आसान होगा और उनकी उपज को सही मूल्य मिलेगा।
कार्यशाला के आयोजन सचिव फसल अनुसंधान प्रभाग के प्रभागाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने किसानों को यह संदेश दिया कि खेती में विविधता ही स्थायित्व की कुंजी है। उन्होंने बताया की समेकित कृषि प्रणाली किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त माध्यम है जबकि फसल विविधीकरण को अपनाकर जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिमों का प्रभाव भी कम किया जा सकता है।
कार्यशाला की संयोजक प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिवानी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते जलवायु के परिद्रश्य मे सिर्फ धान और गेंहु की खेती तक सीमित रहना किसानों के लिए जोखिमप्रद हैं, अतः दलहन, तिलहन, सब्जी एवं चारा फसलों के माध्यम से खेती मे विविधता लाकर किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सकती है।
कार्यशाला के दौरान किसानों को पावर स्प्रेयर, नैपसैक स्प्रेयर, वर्मी बेड और कुदाल जैसे कृषि आदान भी प्रदान किए गए, जिससे फसल सुरक्षा, रोग-कीट प्रबंधन एवं जैविक खाद उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कुलपति डॉ. पी. एस. पाण्डेय का सहयोग प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में आईसीएआर–आरसीईआर, पटना के वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक कुमार, डॉ. गौस अली एवं डॉ. शिवानी सहित कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के विषय-वस्तु विशेषज्ञ डॉ. जगपाल, डॉ. हर्षा बी. आर., डॉ. सौरभ दुबे एवं केंद्र के कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका रही। कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने कहा कि किसानों की सफलता ही ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस कार्यशाला से प्रेरित किसान आने वाले समय में अपने गांवों में दूसरों के लिए उदाहरण बनेंगे।
अंत मे धन्यवाद ज्ञापन कार्यशाला की संयोजक एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिवानी ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, किसानों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

Ayush Prakash
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⁣[AnimeFlix.in] Doraemon Hindi S02E057

Vibhashkumar01
23 Views · 10 months ago

विस्थापितों की सुध नहीं ले रहा सिस्टम, चुनाव में जगी उम्मीद
ठेंगापुर में रह रहे परिवारों को अब तक नहीं मिला कोई लाभ

Ravi Kumar
7 Views · 5 months ago

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Margdarshak News
40 Views · 1 year ago

⁣भारतीय संस्कृति दुनिया की सबसे पुरानी और समृद्ध संस्कृतियों में से एक है। यहाँ कुछ कारण हैं जो भारतीय संस्कृति को दुनिया के अन्य देशों से अच्छा बनाते हैं:

1. *विविधता में एकता*: भारतीय संस्कृति में विभिन्न धर्मों, भाषाओं, और जातियों के लोग शामिल हैं। यह विविधता भारतीय संस्कृति को मजबूत और समृद्ध बनाती है।

2. *परंपरा और आधुनिकता का मेल*: भारतीय संस्कृति में परंपरा और आधुनिकता का मेल देखने को मिलता है। यहाँ लोग अपनी पारंपरिक मूल्यों और रीति-रिवाजों को बनाए रखते हुए आधुनिक तकनीक और विचारों को भी अपनाते हैं।

3. *आतिथ्य और सहयोग*: भारतीय संस्कृति में आतिथ्य और सहयोग का महत्व बहुत अधिक है। यहाँ लोग अपने मेहमानों का स्वागत करने और उनकी मदद करने में गर्व महसूस करते हैं।

4. *शिक्षा और ज्ञान का महत्व*: भारतीय संस्कृति में शिक्षा और ज्ञान का महत्व बहुत अधिक है। यहाँ लोग शिक्षा को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।

5. *प्रकृति के प्रति सम्मान*: भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति सम्मान का महत्व बहुत अधिक है। यहाँ लोग पेड़-पौधों, जानवरों, और प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करते हैं।

6. *सामाजिक समरसता*: भारतीय संस्कृति में सामाजिक समरसता का महत्व बहुत अधिक है। यहाँ लोग अपने समाज में एकता और समरसता को बनाए रखने के लिए काम करते हैं।

7. *धार्मिक सहिष्णुता*: भारतीय संस्कृति में धार्मिक सहिष्णुता का महत्व बहुत अधिक है। यहाँ लोग अपने धर्म के साथ-साथ अन्य धर्मों का भी सम्मान करते हैं।

इन कारणों से भारतीय संस्कृति दुनिया की सबसे समृद्ध और विविध संस्कृतियों में से एक है।

Ayush Prakash
36 Views · 8 months ago

⁣[AnimeFlix.in] Doraemon Hindi S01E23

Ayush Prakash
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[AnimeFlix.in] Doraemon Hindi S04E21

Ravi Kumar
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Ayush Prakash
41 Views · 8 months ago

⁣[AnimeFlix.in] Doraemon Hindi S01E33

Ravi Kumar
15 Views · 8 months ago

(Part-2) तीन दामाद और सास _ Hindi Kahani _ Moral Stories _ Story in Hindi _ Kahani _ Comedy Funny(360P)

Margdarshak News
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⁣आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025: 19 फरवरी से होगा आगाज, जसप्रीत बुमराह समेत 9 स्टार प्लेयर्स हुए बाहर

आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का आगाज 19 फरवरी से होना है। इस टूर्नामेंट का आयोजन पाकिस्तान के लाहौर, कराची और रावलपिंडी और दुबई में होना है। इस टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले 8 टीमों ने अपनी फाइनल स्क्वॉड का एलान कर दिया है। लेकिन कई वर्ल्ड टॉप प्लेयर्स इंजरी के चलते टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं।

भारतीय टीम के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह चैंपियंस ट्रॉफी 2025 से बाहर हो गए हैं। पीठ की समस्या से बुमराह ठीक नहीं हो पाए और बीसीसीआई ने एक्स पर 11 फरवरी को 50 ओवर फॉर्मेट मैच के लिए बुमराह की फिटनेस पर अपडेट दिया। बुमराह ने आखिरी बार साल 2023 वनडे विश्व कप फाइनल में भारत के लिए मैच खेला था।

इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के मिचेल स्टार्क, पैट कमिंस, मिचेल मार्श, जोश हेजलवुड भी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 से बाहर हो गए हैं। ये सभी खिलाड़ी इंजरी के चलते टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।

चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के लिए 8 टीमों ने अपनी फाइनल स्क्वॉड का एलान कर दिया है। इस टूर्नामेंट में भारत, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड, वेस्टइंडीज और श्रीलंका की टीमें हिस्सा ले रही हैं।

चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का आगाज 19 फरवरी से होगा और यह टूर्नामेंट 24 मार्च तक चलेगा। इस टूर्नामेंट के मैच पाकिस्तान के लाहौर, कराची और रावलपिंडी और दुबई में खेले जाएंगे।

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Ayush Prakash
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Margdarshak News
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⁣जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र का जिलाधिकारी ने किया निरीक्षण, उपस्थित आवेदकों से किया संवाद
जिला पदाधिकारी अररिया श्री विनोद दूहन द्वारा जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र (डीआरसीसी), अररिया का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के क्रम में उन्होंने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना, मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना तथा कुशल युवा कार्यक्रम के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
जिला पदाधिकारी ने डीआरसीसी में उपस्थित आवेदकों से सीधे संवाद कर आवेदन करने में उन्हें किसी प्रकार की समस्या या अन्य कठिनाइयों का सामना तो नहीं करना पड़ रहा है, इसकी जानकारी प्राप्त की गई। उन्होंने आवेदकों से योजना से संबंधित मार्गदर्शन, दस्तावेज़ सत्यापन, ऑनलाइन आवेदन तथा स्वीकृति प्रक्रिया की स्थिति के बारे में भी फीडबैक लिया।
निरीक्षण के क्रम में डीएम ने डीआरसीसी प्रबंधक को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं का लाभ पात्र युवाओं तक समयबद्ध, पारदर्शी एवं सरल प्रक्रिया के माध्यम से पहुँचाया जाए। साथ ही, उन्होंने कर्मियों को आवेदकों के प्रति सहयोगी एवं संवेदनशील व्यवहार अपनाने का निर्देश दिया।
जिला पदाधिकारी ने केंद्र में उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं, काउंटर व्यवस्था, प्रतीक्षालय, सूचना पट्ट एवं कार्यप्रणाली का भी अवलोकन किया। मौके पर डीआरसीसी प्रबंधक सहित जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र के सभी पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

Margdarshak News
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⁣ऑन-फार्म जल प्रबंधन प्रशिक्षण से किसानों को मिली वैज्ञानिक खेती की नई दिशा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग द्वारा आत्मा, समस्तीपुर के प्रायोजन से आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “भूमि एवं जल उत्पादकता बढ़ाने हेतु ऑन-फार्म जल प्रबंधन रणनीतियाँ” का सफलतापूर्वक समापन 30 जनवरी 2026 को हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में समस्तीपुर जिले से आए 31 किसान प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए आधुनिक कृषि जल प्रबंधन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में टिकाऊ कृषि के लिए वैज्ञानिक जल प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने तथा अन्य किसानों तक भी पहुँचाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि उत्पादन, जल उपयोग दक्षता तथा किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
डॉ. आशुतोष उपाध्याय, विभागाध्यक्ष, भूमि एवं जल प्रबंधन ने प्रशिक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एकीकृत भूमि-जल प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई, सेंसर आधारित तकनीक, प्राकृतिक खेती एवं मौसम आधारित निर्णय प्रणाली किसानों को संसाधनों के कुशल उपयोग के लिए सक्षम बनाती है। उन्होंने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक सोच के साथ कृषि अपनाने के लिए प्रेरित किया।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, उन्नत भूमि एवं जल प्रबंधन तकनीकें, कृषि में आईओटी एवं एआई/एमएल का उपयोग, फसल विविधीकरण तथा मौसम आधारित कृषि जल प्रबंधन पर व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने अनुसंधान प्रक्षेत्रों और मृदा प्रयोगशालाओं का भ्रमण कर तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव भी प्राप्त किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ. पवन जीत, डॉ. आरती कुमारी, डॉ. आशुतोष उपाध्याय, डॉ. पी. के. सुंदरम, डॉ. राकेश कुमार एवं डॉ. कीर्ति सौरभ के सहयोग से तथा डॉ. सुमीत सौरभ (परियोजना निदेशक, आत्मा, समस्तीपुर) के प्रायोजन में संचालित किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. मणिभूषण, डॉ. अजय कुमार, डॉ. विकास कुमार एवं डॉ. शिवानी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

Ravi Kumar
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Ayush Prakash
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