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Copy of Kahani ऑनलाइन रहने का सियप्पा Story in Hindi _ Hindi Story _ Moral Stories _ Bedtime Stories
Copy of Kahani ऑनलाइन रहने का सियप्पा Story in Hindi _ Hindi Story _ Moral Stories _ Bedtime Stories _ New(360P)
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Copy of Kahani चायनिज़ बहू - Story in Hindi _ Hindi Story _ Moral Stories _ Bedtime Stories _ Kahani
Copy of Kahani चायनिज़ बहू - Story in Hindi _ Hindi Story _ Moral Stories _ Bedtime Stories _ Kahaniya 2022(360P)
समेकित खेती एवं फसल विविधीकरण ने पश्चिम चंपारण के किसानों को दिखाई नई राह : दो दिवसीय कार्यशाला का सफल समापन
पश्चिम चंपारण के किसानों के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना तथा कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के संयुक्त तत्वाधान मे आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि खेती को लेकर सोच बदलने का अनुभव बनकर सामने आया।
दिनांक 28 से 29 जनवरी 2026 तक चले इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले जिले के 200 से अधिक किसानों ने महसूस किया कि सीमित भूमि और संसाधनों के बावजूद खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। कार्यक्रम में शामिल किसानों ने जाना कि अब खेती केवल धान या गेहूं तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और जैविक खाद निर्माण जैसे कार्यों को जोड़कर वर्ष भर नियमित आय प्राप्त की जा सकती है।
विशेषज्ञों द्वारा दी गई व्यावहारिक जानकारी ने किसानों को यह विश्वास दिलाया कि बदलते मौसम और बाजार की अनिश्चितताओं के बीच भी खेती सुरक्षित बन सकती है।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि श्री आर. के. तिवारी, प्रबंधक, मगध शुगर मिल, बेतिया ने किसानों के अनुभवों को सुनते हुए कहा कि जब किसान वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाते हैं, तभी ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि कृषि और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल से किसानों को बाजार से जोड़ना आसान होगा और उनकी उपज को सही मूल्य मिलेगा।
कार्यशाला के आयोजन सचिव फसल अनुसंधान प्रभाग के प्रभागाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने किसानों को यह संदेश दिया कि खेती में विविधता ही स्थायित्व की कुंजी है। उन्होंने बताया की समेकित कृषि प्रणाली किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त माध्यम है जबकि फसल विविधीकरण को अपनाकर जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिमों का प्रभाव भी कम किया जा सकता है।
कार्यशाला की संयोजक प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिवानी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते जलवायु के परिद्रश्य मे सिर्फ धान और गेंहु की खेती तक सीमित रहना किसानों के लिए जोखिमप्रद हैं, अतः दलहन, तिलहन, सब्जी एवं चारा फसलों के माध्यम से खेती मे विविधता लाकर किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सकती है।
कार्यशाला के दौरान किसानों को पावर स्प्रेयर, नैपसैक स्प्रेयर, वर्मी बेड और कुदाल जैसे कृषि आदान भी प्रदान किए गए, जिससे फसल सुरक्षा, रोग-कीट प्रबंधन एवं जैविक खाद उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कुलपति डॉ. पी. एस. पाण्डेय का सहयोग प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में आईसीएआर–आरसीईआर, पटना के वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक कुमार, डॉ. गौस अली एवं डॉ. शिवानी सहित कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के विषय-वस्तु विशेषज्ञ डॉ. जगपाल, डॉ. हर्षा बी. आर., डॉ. सौरभ दुबे एवं केंद्र के कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका रही। कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने कहा कि किसानों की सफलता ही ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस कार्यशाला से प्रेरित किसान आने वाले समय में अपने गांवों में दूसरों के लिए उदाहरण बनेंगे।
अंत मे धन्यवाद ज्ञापन कार्यशाला की संयोजक एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिवानी ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, किसानों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
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Kahani विधवा की शादी_ Saas Bahu Ki Kahaniya _ Moral Stories _ Hindi Kahaniya TV _ Stories in Hindi(3
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Copy of Kahan टॉम एंड जेरी सास बहु Story in Hindi _ Hindi Story _ Moral Stories _ Bedtime Stories _ New(360P)
ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण हेतु समन्वय बैठक व सितारा योजना उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित
ट्रांसजेंडर समुदाय के व्यक्तियों के कल्याणार्थ एवं उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने हेतु समन्वय बैठक तथा सितारा योजना संबंधी उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन समाज कल्याण विभाग अंतर्गत जिला बाल संरक्षण इकाई अररिया के तत्वावधान में जिला पदाधिकारी अररिया श्री विनोद दूहन के निर्देशानुसार किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सहायक निदेशक बाल संरक्षण इकाई अररिया श्री शंभू कुमार रजक, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार अररिया श्री अभय श्रीवास्तव, विशेषज्ञ रेशमा प्रसाद, चिकित्सक डॉक्टर जितेंद्र कुमार, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी आईसीडीएस श्रीमती कविता कुमारी एवं उपस्थित सभी हितधारकों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वालित कर किया।
कार्यक्रम के स्वागत संबोधन में सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई अररिया श्री शंभू कुमार रजक ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रति समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों से आग्रह किया कि सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ट्रांसजेंडर समुदाय को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार अररिया के सचिव श्री रोहित श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा है। इन्हें समाज से अलग नहीं, बल्कि साथ जोड़कर आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कानूनी अधिकारों, संरक्षण एवं जागरूकता पर बल देते हुए कहा कि अधिकारों की जानकारी से ही सामाजिक समावेशन संभव है।
कार्यक्रम की मुख्य वक्त विशेषज्ञ रेशमा प्रसाद ने लिंग की परिभाषा को विस्तार पूर्वक समझाते हुए कहा कि जेंडर एक प्रकार से परफॉर्मेंस है, जो किस प्रकार परफॉर्म करता है यह उस पर निर्भर करता हैऔर प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पहचान स्वीकार करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि किसी की पहचान अपराध नहीं है, बल्कि उसकी अस्मिता है। “मेरी पहचान मेरा जेंडर है”—इस विचार के साथ उन्होंने समाज से अपील की कि ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मान, अवसर और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाए, ताकि वे आत्मसम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ सकें।
उन्होंने कहा कि 'सितारा' योजना विशेष रूप से ट्रांसजेंडर समुदाय के सशक्तिकरण, सामाजिक एकीकरण, पुनर्वास और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक बनाया गया है। इस योजना के तहत, जिलेवार कमिटी गठित की गई है जो पहचान पत्र जारी करने, समुदाय को जागरूकता करने और कानूनी सहायता के माध्यम से ट्रांसजेंडर समुदाय की चुनौतियों का समाधान करने का काम करती हैं। उन्होंने अपने संबोधन में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की समस्याएं, सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास एवं माननीय न्यायालय के आदेश संबंधी विशेष जानकारी एवं अपना अनुभव भी साझा किए।
इससे पूर्व उपस्थित अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से ट्रांसजेंडर समुदाय के उपस्थित सभी व्यक्तियों को शॉल एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से ट्रांसजेंडर समुदाय के सामाजिक, आर्थिक एवं कानूनी सशक्तिकरण को लेकर सकारात्मक संवाद स्थापित हुआ। बैठक में महाप्रबंधक उद्योग केंद्र अररिया सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, कर्मी एवं किन्नर समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे।
ऑन-फार्म जल प्रबंधन प्रशिक्षण से किसानों को मिली वैज्ञानिक खेती की नई दिशा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग द्वारा आत्मा, समस्तीपुर के प्रायोजन से आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “भूमि एवं जल उत्पादकता बढ़ाने हेतु ऑन-फार्म जल प्रबंधन रणनीतियाँ” का सफलतापूर्वक समापन 30 जनवरी 2026 को हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में समस्तीपुर जिले से आए 31 किसान प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए आधुनिक कृषि जल प्रबंधन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में टिकाऊ कृषि के लिए वैज्ञानिक जल प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने तथा अन्य किसानों तक भी पहुँचाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि उत्पादन, जल उपयोग दक्षता तथा किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
डॉ. आशुतोष उपाध्याय, विभागाध्यक्ष, भूमि एवं जल प्रबंधन ने प्रशिक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एकीकृत भूमि-जल प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई, सेंसर आधारित तकनीक, प्राकृतिक खेती एवं मौसम आधारित निर्णय प्रणाली किसानों को संसाधनों के कुशल उपयोग के लिए सक्षम बनाती है। उन्होंने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक सोच के साथ कृषि अपनाने के लिए प्रेरित किया।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, उन्नत भूमि एवं जल प्रबंधन तकनीकें, कृषि में आईओटी एवं एआई/एमएल का उपयोग, फसल विविधीकरण तथा मौसम आधारित कृषि जल प्रबंधन पर व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने अनुसंधान प्रक्षेत्रों और मृदा प्रयोगशालाओं का भ्रमण कर तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव भी प्राप्त किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ. पवन जीत, डॉ. आरती कुमारी, डॉ. आशुतोष उपाध्याय, डॉ. पी. के. सुंदरम, डॉ. राकेश कुमार एवं डॉ. कीर्ति सौरभ के सहयोग से तथा डॉ. सुमीत सौरभ (परियोजना निदेशक, आत्मा, समस्तीपुर) के प्रायोजन में संचालित किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. मणिभूषण, डॉ. अजय कुमार, डॉ. विकास कुमार एवं डॉ. शिवानी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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